Somvati Amavasya 2023

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Somvati Amavasya 2023

Somvati Amavasya 2023:

2023 की सोमवती अमावस्या 17 जुलाई को होगी। इस दिन उपवास रखा जाता है और पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है। सोमवती अमावस्या के महत्व के रूप में, पीपल के पेड़ की परिक्रमा से जीवन में सुख और शांति प्राप्त होती है। पति को दीर्घायु प्राप्त होती है और इस दिन दान का विशेष महत्व होता है। सोमवती अमावस्या पूजा करने से पितृ दोष दूर होता है, पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त होता है और जीवन में आने वाली कठिनाइयां दूर हो जाती हैं।

सोमवती अमावस्या का पौराणिक महत्व

इस दिन तीर्थ स्थानों और नदियों में स्नान करने से जातक की मनोकामना पूरी होती है।

उज्जैन के सोमतीर्थ कुंड में स्नान करने से जातक को विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।

इस दिन मौन व्रत रखने से सहस्र गोदान के समान पुण्य प्राप्त होता है।

भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सौभाग्यवती स्त्रियों को अपने अखण्ड सौभाग्य के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

पत्नी द्वारा इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करने से पति की आयु लंबी होती है। ऐसा माना जाता है कि पीपल के वृक्ष में भगवान शिव का वास होता है।

इस दिन तुलसी की पूजा करने से घर की दरिद्रता का नाश होता है।

इस दिन भगवान सूर्य को अर्ध्य देने से भाग्य में वृद्धि होती है और धन की कोई कमी नहीं रहती।

सोमवती अमावस्या पर गाय को चारा खिलाने से महान पुण्य प्राप्त होता है।

गरीबों को अन्न और वस्त्र दान करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है।

पितरों की शांति के लिए इस दिन उन्हें जल देना चाहिए और पिंडदान करना चाहिए। ऐसा करने से पितरों को शांति मिलती है।

सोमवती अमावस्या से जुड़ी कथा : ( Somvati Amavas Katha )

एक समय की बात है, एक गांव में एक दरिद्र ब्राह्मण अपनी पत्नी और एक बेटी के साथ रहता था। उसकी बेटी बहुत सुंदर, सुशील और गुणवान थी। ब्राह्मण को ऐसा लगता था कि उसकी दरिद्रता के कारण उसकी बेटी का विवाह नहीं हो पा रहा है। इससे वह बहुत दुखी रहता था।

सौभाग्यशाली रूप से, एक दिन उसके यहाँ एक साधू आया। उससे ब्राह्मण ने अपनी सारी व्यथा सुनाई। उसने उसकी बेटी के हाथ को देखा और उसे बताया कि उसकी पुत्री के वैधव्य का दोष है, जिसके कारण विवाह वाले दिन ही साँप के काटने से उसके पति की मृत्यु हो जाएगी। यह सुनकर ब्राह्मण को बहुत ही दुःख हुआ और वह रोते हुए उस साधू के पैरों के नीचे गिर पड़ा। रो-रोकर वह उस साधू से उस दोष के निवारण के लिए प्रार्थना करने लगा।

तब उस साधू ने उसे बताया कि उसके गांव में एक सोना नाम की धोबन रहती है, जो बहुत ही संस्कारवान, पतिव्रता और धर्मपरायण स्त्री है। वह सोमवती अमावस्या का व्रत करती है और यदि वह इसे सुहाग के आशीर्वाद के साथ अपने व्रतों का पुण्यफल दे दे, तो इस दोष का निवारण हो जाएगा।

फिर उसकी मां ने साधू से पूछा कि वह इसे अपने व्रतों का पुण्य क्यों देगी? तब साधू ने उसे उपाय बताया और कहा कि उसके सात पुत्र और सात पुत्रवधूएं हैं, परंतु वे सभी आलसी हैं और घर के काम न करने के बहाने ढूँढ़ती रहती हैं, और काम के नाम पर आपस में लड़ाई-झगड़े करती हैं। तुम अपनी बेटी से कहो कि वह हर दिन सुबह-सुबह जल्दी उठकर बिना किसी को बताए उसके घर के सारे काम करके अपने घर आ जाए। उसके बाद उचित समय पर उस सोना धोबिन को अपनी सारी परिस्थिति बता देना। ईश्वर सब ठीक कर देगा। यह कहकर साधू वहाँ से चले गए।

साधू के कथनानुसार वह ब्राह्मण की बेटी प्रतिदिन सुबह-सुबह उठकर उस सोना धोबिन के यहाँ सारा काम करके बिना किसी को बताए अपने घर चली जाती। जब कुछ दिनों तक सोना ने देखा कि सारा घर व्यवस्थित है और घर के सभी काम शांति से हो रहे हैं, तो उसे बहुत प्रसन्नता हुई। उसने अपनी बहनों से पूछा कि कौन हर दिन सुबह ही सभी कार्य पूरे कर रहा है? बहनों ने झूठ कह दिया कि उनसब ने मिलकर वह कार्य किए हैं। सोना को उनकी बातों पर विश्वास नहीं हुआ और उसने स्वयं देखने का निर्णय किया कि कौन प्रातःकाल ही घर के सारे काम कर देता है।

सोना रात को ही छुपकर एक कोने में बैठ गई और इंतजार करने लगी। तब उसने देखा कि वह ब्राह्मण की पुत्री उसके घर के काम कर रही है। तब उसने उससे पूछा कि तुम कौन हो? और बिना बताए मेरे घर के काम क्यों कर रही हो? तब उस लड़की ने उसे कहा कि मैं आपको सब बताऊँगी, परंतु आपको मेरी बात मानने का वचन देना होगा। उसने उसे वचन दे दिया। तब उस लड़की ने उसे सारी कथा सुना दी और उससे कहा कि आप ही मुझे सुहाग दे सकती हैं। आप ही मेरे वैधव्य के दोष को नष्ट कर सकती हैं। कृपया आप मेरी सहायता करें और मुझे आपके सोमवती अमावस्या के व्रत का पुण्यफल प्रदान करें।

सोना उसे पहले ही वचन दे चुकी थी। इसीलिए उसने हाँ कर दी। सौभाग्यशाली रूप से, जल्द ही उसके लिए उत्कृष्ट वर मिल गया। उस विवाह में ब्राह्मण दम्पति ने उस सोना धोबिन को बुलाया। सोना ने अपने बेटे और बहनों को बुलाकर कहा कि मैं पास के गांव में एक शादी में जा रही हूँ। मेरे पीछे से तुम अपने पिता का ध्यान रखना और यदि तुम्हारे पिता को कुछ हो जाए, तो तुम मेरे आने का इंतजार करना। यह कहकर सोना वहाँ से निकल गई।

सोना के आने के बाद ही वह ब्राह्मण दम्पति अपनी पुत्री के विवाह की तैयारियाँ आरंभ करते हैं। और जब विवाह का दिन आता है, तो सोना धोबिन उनसे कच्चा करवा, दूध और तार लाने को कहती हैं। विवाह के समय सोना धोबिन दूल्हा-दुल्हन के पास बैठ गई और जब दूल्हे की मृत्यु बनकर एक साँप उसे काटने आया, तो सोना धोबिन उसे मार दिया। और फिर उस लड़की को संकल्प के द्वारा अपने किए सभी सोमवती अमावस्याओं का पुण्यफल दे दिया और कहा, कि मैंने आजतक जितनी भी अमावस्याओं के व्रत से पुण्य अर्जित किया है, वह मैं इस ब्राह्मण की पुत्री को देती हूँ और अबसे जो मैं अमावस्याओं के व्रत करूँ, उनका पुण्यफल मेरे पति और पुत्रों को प्राप्त हो।

वहाँ उपस्थित सभी लोगों ने सोना धोबिन का जयगोष किया और साथ ही सोमवती अमावस्या के व्रत के प्रति उनके मन में श्रद्धा उत्पन्न हुई। वे सभी सोमवती अमावस्या का गुणगान करने लगे।

इसके बाद सोना धोबिन अपने घर के लिए चल दी उस दिन सोमवती अमावस्या थी। उसने हर बार की तरह उस दिन भी व्रत किया और मार्ग में पीपल के वृक्ष की पूजा की और उसके नीचे बैठकर कहानी कही और फिर पीपल के वृक्ष की १०८ परिक्रमा की।

उधर, ब्राह्मण की बेटी को सुहाग देने से उसके स्वयं के पति की मृत्यु हो जाती है। उसके घर के सभी लोग उसकी प्रतीक्षा कर रहे थे, ताकि वे उसका क्रियाकर्म कर सकें। परंतु सोना धोबिन के सोमवती अमावस्या के व्रत के पुण्य के प्रताप से उसके घर पहुंचते ही उसका पति पुनर्जीवित हो उठा। और वहाँ उपस्थित सभी लोग विस्मित हो गए। तब सोना धोबिन ने उनको सोमवती अमावस्या के पुण्यदायी व्रत के विषय में बताया।

उसके बाद सब लोगों ने उनकी कथा का महात्म्य फैलाने लगा। और सब ने इस महान पुण्यदायक व्रत को करने लगे। हे ईश्वर! जैसे आपने ब्राह्मण की पुत्री और सोना धोबिन के सुहाग की रक्षा की वैसे ही सभी के सुहाग की रक्षा करें।

सोमवती अमावस्या पूजा विधि-विधान (Somvati Amavasya vrat puja vidhi in hindi)

सुबह मौन रहकर किसी भी पवित्र नदी में स्नान करें। इससे पितरों को भी शांति मिलती है और हो सके तो पूरा दिन मौन व्रत धारण रखें।

इस दिन गंगा नदी या तीर्थ स्थानों पर स्नान करने का विशेष महत्व होता है। परंतु यदि आप गंगा स्नान नहीं कर सकते, तो स्नान के जल में थोड़ा सा गंगा जल मिला कर स्नान करें।

स्नान के बाद नित्य कर्मों के निवृत्त होकर मंदिर जाएं और भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। भगवान शिव को दूध चढ़ाएं, जल चढ़ाएं, बेलपत्र और पुष्प चढ़ाएं। रोली, चावल, मेहंदी से माता पार्वती की पूजा करें और धूप-दीप जलाकर आरती करें।

इसके बाद पीपल के वृक्ष की पूजा करें। पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं, रोली और चावल से पूजा करें, दीपक जलाएं और पीपल के वृक्ष की 108 परिक्रमा करें। ऐसा करने से साधक के सौभाग्य में बढ़ोतरी होती है।

सोमवती अमावस्या पर तुलसी जी का पूजन भी करें। तुलसी में जल चढ़ाएं, रोली, मोली, चावल से पूजा करें और दीपक जलाएं। उसके बाद तुलसी जी की 108 परिक्रमा करें। इस दिन तुलसी पूजन करने से घर की गरीबी का नाश होता है।

फिर भगवान सूर्य को अर्ध्य दें। गायों को चारा खिलाएं, गरीबों को अन्न और वस्त्र का दान करें।

अपने पितरों की शांति के लिए पितरों को जल दें और यदि संभव हो तो तीर्थ स्थान पर जाकर उनके नाम से पिंडदान करें। ऐसा करने से आपके पितरों को शांति मिलती है।

सोमवती अमावस्या और हरियाली अमावस्या पर वृक्षारोपण करना बहुत शुभ होता है।

विवाह के पहले वर्ष में पहली सोमवती अमावस्या पर हल्दी, पान, धान, सिंदूर और सुपाड़ी के साथ 108 परिक्रमा करें। उसके बाद किसी योग्य ब्राह्मण को सामर्थ्य अनुसार फल, मिठाई, भोजन सामग्री और सुहाग का सामान साथ में परिक्रमा में चढ़ाया गया सामान दें।

SomvatI Amavasya 2022 Date Muhurat Puja Vidhi: सोमवार, 30 मई 2022

अमावस्या तिथि समाप्त-  सोमवार,30 मई शाम 04 बजकर 59 मिनट पर।

सोमवती अमावस्या को वट सावित्री व्रत भी मनाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह दिन दोनों व्रतों के संयोग का दिन है, जो पति की लंबी आयु और सौभाग्य की कामना के लिए किया जाता है। सोमवती अमावस्या पर पीपल के वृक्ष में पूजा की जाती है और वट सावित्री व्रत के लिए वट यानी बरगद के वृक्ष में पूजा की जाती है।

सोमवती अमावस्या का मुहूर्त:

अमावस्या तिथि की आरंभ: रविवार, 29 मई, दोपहर 02:54 से

अमावस्या तिथि समाप्ति: सोमवार, 30 मई, शाम 04:59 बजे।

इस विशेष दिन को मान्यता के साथ आप उपरोक्त विधि के अनुसार पूजा और व्रत आचरण कर सकते हैं। यह सोमवती अमावस्या का व्रत रखने और पूजा करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। सोमवती अमावस्या की पूजा विधि का पालन करने से विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और पूजा करती हैं।

ध्यान दें: उपरोक्त मुहूर्त और तिथियाँ वर्तमान साल 2022 के लिए हैं और साल बदलने के बाद इन मुहूर्तों में बदलाव हो सकता है। अपने क्षेत्र के पंडित से सत्यापित करें और अपनी स्थानीय परंपराओं के अनुसार व्रत और पूजा आचरण करें।

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