Hariyali Teej

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हरियाली तीज: एक अद्वितीय व्रत और उत्सव

परिचय ( Introduction)

हरियाली तीज एक प्रमुख हिन्दू त्योहार है जो मुख्य रूप से भारत के उत्तर एवं पश्चिमी भागों में मनाया जाता है। यह त्योहार सबसे ज्यादा हरियाली रंग के वसंतीय दृश्यों की ख़ुशियां मनाने का एक अद्वितीय और आनंददायक उत्सव है। हरियाली तीज व्रत और पूजा का आयोजन जीवन साथी की दीर्घायु, पति-पत्नी के नये साल के आगमन और प्रेम व वैवाहिक सुख की कामना के लिए किया जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से नारीशक्ति, प्रेम व वैवाहिक खुशहाली एवं खुशियां मनाने का प्रतीक माना जाता है।

हरियाली तीज का महत्व ( Significance of Hariyali Teej )

हरियाली तीज को मासिक श्रवण कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस त्योहार के दौरान, महिलाएं व्रत रखती हैं, पूजा अर्चना करती हैं और अपने पति की लंबी आयु और सुख-शांति की कामना करती हैं। हरियाली तीज का उद्देश्य सामूहिक रूप से सुख और समृद्धि के प्रतीक के रूप में माना जाता है, जो समाज में प्रेम, सौहार्द और एकता की भावना को बढ़ावा देता है।

धार्मिक महत्व ( Religious Significance )

हरियाली तीज हिन्दू धर्म में एक प्रमुख त्योहार है, जो धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है। यह त्योहार महिलाओं के लिए खास महत्व रखता है, जो इस दिन व्रत रखकर और पूजा करके अपनी भक्ति और धार्मिकता का प्रदर्शन करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरियाली तीज व्रत और पूजा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन साथी के साथ सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

सांस्कृतिक एवं विनोदी पारंपरिक कार्यक्रम

हरियाली तीज के अलावा, इस अवसर पर कई सांस्कृतिक और विनोदी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ये कार्यक्रम राजस्थान और पंजाब में विशेष रूप से आयोजित होते हैं और इनमें गीत-नृत्य, मेहंदी और कुछ सांस्कृतिक प्रदर्शन शामिल होते हैं। इसके अलावा, महिलाएं हरियाली रंग के कपड़े पहनती हैं और खेल-दौड़ का आनंद लेती हैं। ये सभी कार्यक्रम महिलाओं को एक साथ आनंद और उत्साह की भावना प्रदान करते हैं और सामूहिक रूप से समृद्धि की कामना करते हैं।

हरियाली तीज के व्रत और रीति-रिवाज

हरियाली तीज के दिन महिलाएं उठते ही नहाने के बाद सुंदर वस्त्र और श्रृंगार करती हैं। वे पूजा स्थल पर जाती हैं और गहनों, मेहंदी और फूलों से अपनी सजावट करती हैं। व्रत के दौरान, महिलाएं नियमित रूप से जल, फल और व्रत के व्रत संबंधी परंपराओं का पालन करती हैं। वे पति-पत्नी के लंबे और समृद्धि के जीवन की कामना करती हैं और व्रत के बाद विशेष प्रसाद का सेवन करती हैं। व्रत के बाद, महिलाएं पर्याप्त समय के लिए पूरे परिवार के साथ मनोरंजन करती हैं और खुशहाल व समृद्ध जीवन की कामना करती हैं।

नई जीवन की शुरुआत

हरियाली तीज का त्योहार महिलाओं के लिए एक नई जीवन की शुरुआत का प्रतीक है। यह उनकी बंधन और प्रेम के संबंधों को मजबूत और समृद्ध करने का अवसर है। हरियाली तीज के व्रत और पूजा का पालन करने से महिलाओं के जीवन में प्रेम, सम्बन्ध और संगठन की भावना व आदत सुदृढ़ होती है। यह त्योहार महिलाओं को उनके धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को याद दिलाने और सम्मानित करने का एक महान माध्यम है

हरियाली तीज का आयोजन

हरियाली तीज त्योहार को महिलाएं बहुत ही उत्साह और आनंद के साथ मनाती हैं। यह तीज त्योहार विशेष रूप से राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस उत्सव के दौरान, महिलाएं अपनी सौंदर्य और सांख्यिकीय विशेषताओं को बढ़ावा देती हैं और हरी रंग के कपड़े पहनती हैं। वे पूजा-अर्चना, गीत-नृत्य, खेल-दौड़ और व्रत विधियों का पालन करती हैं।

हरियाली तीज का महत्वपूर्ण प्रसंग

पति-पत्नी के संबंध का महत्व

हरियाली तीज एक महत्वपूर्ण प्रसंग है जो पति-पत्नी के संबंधों को मजबूत बनाने का अवसर प्रदान करता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और समृद्धि की कामना करती हैं। वे अपने पति के लिए व्रत रखती हैं और पूजा करती हैं, जिससे उनके पति-पत्नी के संबंधों में प्रेम, सम्बन्ध और संगठन की भावना सुदृढ़ होती है।

नारी शक्ति की प्रतीकता

हरियाली तीज एक महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण त्योहार है, जो नारी शक्ति की महत्वपूर्ण प्रतीकता है। महिलाएं इस दिन मेहंदी लगाती हैं, हरी साड़ी पहनती हैं और पूजा-अर्चना में भाग लेती हैं। यह एक विशेष रूप से सम्मानित त्योहार है जो महिलाओं को उनके सामरिक और सांस्कृतिक मूल्यों को याद दिलाता है।

प्रकृति के साथ मेल-जोल

हरियाली तीज एक प्रकृति के साथ मेल-जोल त्योहार है जो वर्षा के मौसम में मनाया जाता है। इस दिन वृक्षारोपण और पौधा संरक्षण को बढ़ावा दिया जाता है। महिलाएं प्रकृति की सुंदरता को देखने के लिए प्रदर्शन करती हैं और हरी वादियों में घूमती हैं। यह एक प्राकृतिक त्योहार है जो हमें प्रकृति के महत्व को समझने और संरक्षण करने की अहमियत याद दिलाता है।

हरियाली तीज 2023 शुभ मुहूर्त( Hariyali Teej Puja Muhurat)


वैदिक पंचांग के अनुसार सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर हरियाली तीज का त्योहार मनाया जाता है। इस तृतीया तिथि 18 अगस्त 2023 को रात 08 बजकर 01 मिनट से शुरू हो जाएगी। इसका समापन 19 अगस्त को रात 10 बजकर 19 मिनट पर होगा। ऐसे में

आइए जानते हैं पूजा के लिए कब-कब मुहूर्त है।

(हरियाली तीज 19 अगस्त 2023)



सुबह का मुहूर्त – सुबह 7 बजकर 47 मिनट से 09 बजकर 22 मिनट तक


दोपहर का मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 32 मिनट से दोपहर 02 बजकर 07 मिनट तक


शाम का मुहूर्त- शाम 06 बजकर 52 मिनट से रात 07 बजकर 15 मिनट तक


रात का मुहूर्त- रात 12 बजकर 10 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक

हरियाली तीज पूजा विधि (Hariyali Teej Vrat Puja Vidhi)

इस दिन रखा जाने वाला व्रत या उपवास अत्यंत कठिन माना जाता है। भगवान शिव और देवी पार्वती दोनों का आशीर्वाद पाने के लिए अनुष्ठानों को अत्यधिक सावधानी से किया जाना चाहिए। इसलिए, हमने नीचे इस दिन के लिए संपूर्ण पूजा विधि की एक सूची तैयार की है:

महिलाओं को इस दिन जल्दी उठना चाहिए, अधिमानतः पवित्र ब्रह्म मुहूर्त के दौरान, यानी, सूरज उगने से दो घंटे पहले।

पूजा करने के लिए स्नान करें और हरे रंग के कपड़े पहनें।

पूजा कक्ष और चौकी को पवित्र जल से साफ करें।

चौकी पर साफ लाल या सफेद कपड़ा बिछाएं।

देवी पार्वती, भगवान शिव और उनके पुत्र भगवान गणेश की मूर्तियाँ बनाने के लिए जैविक मिट्टी का उपयोग करें। यदि यह संभव न हो तो भगवान की धातु की मूर्तियों का भी उपयोग कर सकते हैं।

मूर्तियों को पूरे सम्मान के साथ चौकी पर रखें।

चौकी के दाहिनी ओर घी या तेल का दीपक जलाएं।

 पूजा शुरू करने के लिए भगवान गणेश का आह्वान करें।

शिव लिंग या भगवान की मूर्ति पर अक्षत लगाएं और उसके सामने तांबे का कलश रखें और कलश के चारों ओर कलावा घुमाएं।

कलश पर सुपारी, कुमकुम, हल्दी और गंगा जल रखें।

आम के पत्तों का उपयोग इस प्रकार करें कि पत्तों के सिरे कलश के अंदर के पानी को छूते रहें जबकि पत्तों का सिरा खुला रहे।

इसके बाद कलश के ऊपर छिलके सहित एक नारियल रखें।

अपनी प्रार्थनाएँ ईमानदारी से करने का संकल्प लें।

अपने हाथ साफ करें और मूर्तियों पर गंगा जल चढ़ाकर पूजा शुरू करें।

भगवान शिव को धतूरा, चंदन और सफेद फूल चढ़ाएं जबकि देवी को लाल फूल चढ़ाएं।

देवी को सुहाग सामग्री का भोग लगाएं। सोलह श्रृंगार की इस किट में सिन्दूर, कुमकुम, मेहंदी, काजल, हल्दी, आलता, चूड़ियाँ, लाल चुनरी आदि शामिल हैं।

भगवान को प्रसाद या नैवेद्यम अर्पित करें।

भाद्रपद शुक्ल तीज को हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है। इस व्रत को सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं। जबकि कुंवारी कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए इस व्रत को रखती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति रूप में पाने के लिए इस व्रत को किया था। देवी पार्वती की घोर तपस्या देखकर भगवान शिव उनके सामने आए और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसके बाद से ही अविवाहित महिलाएं मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए इस व्रत को करती हैं जबकि विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत करती हैं।

हरतालिका तीज 2022 तारीख और मुहूर्त (Hartalika Teej 2022 shubh muhurat)

भादो शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि आरंभ – 29 अगस्त 2022 सोमवार को शाम 3 बजकर 21 मिनट से

भादो शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि समाप्ति – 30 अगस्त 2022 मंगलवार को शाम 3 बजकर 34 मिनट तक

उदयातिथी के अनुसार हरतालिका तीज का त्योहार 30 अगस्त 2022 को मनाया जाएगा.

सुबह का शुभ मुहूर्त-  30 अगस्त 2022, सुबह 06.05 – 08.38 बजे तक

प्रदोष काल मुहूर्त – 30 अगस्त 2022, शाम 06.33- रात 08.51 तक

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