Somvati Amvasya

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Somvati Amvasya- सोमवती अमावस्या का पुराणिक महत्व

Somvati Amvasya, सोमवती अमावस्या का दिन पुराणों में भी बहुत महत्व दिया गया है। स्कंद पुराण के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसीलिए इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और संतान प्राप्ति का वरदान मिलता है।

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, सोमवती अमावस्या के दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार में देवताओं की रक्षा की थी। इसीलिए इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से रोगों से मुक्ति और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।

सोमवती अमावस्या पर स्नान और दान का महत्व

सोमवती अमावस्या के दिन स्नान और दान का बहुत महत्व है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

सोमवती अमावस्या का समय और मुहूर्त

सोमवती अमावस्या 2023, 13 नवंबर को, सुबह 6:31 बजे से शुरू होकर, 14 नवंबर को, सुबह 5:01 बजे तक समाप्त होगी।

इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:48 बजे से 8:11 बजे तक है।

सोमवती अमावस्या पर पितरों का श्राद्ध

सोमवती अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध करने से उन्हें शांति मिलती है और उनकी आत्माएं तृप्त होती हैं। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।

सोमवती अमावस्या के दिन ध्यान और मंत्रों का जाप

सोमवती अमावस्या के दिन ध्यान और मंत्रों का जाप करने से मन को शांति मिलती है और आध्यात्मिक उन्नति होती है। इस दिन भगवान शिव के मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करने से विशेष लाभ प्राप्त होते हैं।

सोमवती अमावस्या के दिन उपवास और ब्रह्मचर्य

सोमवती अमावस्या के दिन उपवास और ब्रह्मचर्य का पालन करने से शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं। इस दिन उपवास रखने से शरीर में विषैले पदार्थों का नाश होता है और मन शुद्ध होता है। ब्रह्मचर्य का पालन करने से मन को शांति मिलती है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।

सोमवती अमावस्या के दिन विशेष उपाय

इस दिन भगवान शिव के मंदिर में जाकर रुद्राभिषेक करें।

इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान करें।

इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के मंत्रों का जाप करें।

इस दिन व्रत रखें और उपवास करें।

इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।

Conclusion :

सोमवती अमावस्या हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो हमें भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का अवसर प्रदान करता है। इस दिन पूजा करने से हमें सभी मनोकामनाओं की पूर्ति, पितरों की आत्माओं को शांति, पुण्य की प्राप्ति, रोगों से मुक्ति, शत्रुओं पर विजय, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति, संतान प्राप्ति और आर्थिक उन्नति प्राप्त होती है।

इस दिन हमें भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के साथ-साथ स्नान, दान, पितरों का श्राद्ध, ध्यान, मंत्रों का जाप, उपवास और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। ऐसा करने से हमें इस दिन के विशेष लाभ प्राप्त होंगे और हमारा जीवन सुखमय और समृद्ध होगा।

सोमवती अमावस्या क्या है?

सोमवती अमावस्या हिंदू पंचांग के अनुसार एक महत्वपूर्ण तिथि है जो अमावस्या के दिन होती है।

सोमवती अमावस्या का महत्व क्या है?

सोमवती अमावस्या का महत्व पुराणों में विशेष रूप से बताया गया है, जो इसे भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के दिन के रूप में जानते हैं।

इस दिन किस भगवान की पूजा की जाती है?

सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।

क्या भगवान विष्णु का भी कोई महत्व है इस दिन?

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, सोमवती अमावस्या के दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार में देवताओं की रक्षा की थी, इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से विशेष फल मिलता है।

सोमवती अमावस्या पर स्नान क्यों महत्वपूर्ण है?

सोमवती अमावस्या के दिन स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

सोमवती अमावस्या के दिन किसे दान देने का प्राम्य होता है?

इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

सोमवती अमावस्या का समय क्या होता है?

सोमवती अमावस्या 2023 में, 13 नवंबर को, सुबह 6:31 बजे से शुरू होकर, 14 नवंबर को, सुबह 5:01 बजे तक समाप्त होगी।

सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव की पूजा का शुभ मुहूर्त कब होता है?

इस दिन भगवान शिव की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:48 बजे से 8:11 बजे तक होता है।

सोमवती अमावस्या के दिन किसे पितरों का श्राद्ध करने का आदर्श माना गया है?

सोमवती अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध करने का आदर्श माना गया है।

सोमवती अमावस्या के दिन किसे ध्यान और मंत्रों का जाप करने की सिफारिश की जाती है?

सोमवती अमावस्या के दिन ध्यान और मंत्रों का जाप करने से मन को शांति मिलती है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।

सोमवती अमावस्या के दिन किसे उपवास और ब्रह्मचर्य का पालन करने की सिफारिश की जाती है

सोमवती अमावस्या के दिन उपवास और ब्रह्मचर्य का पालन करने से शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं

सोमवती अमावस्या के दिन किसे विशेष उपाय करने की सिफारिश की जाती है?

इस दिन भगवान शिव के मंदिर में जाकर रुद्राभिषेक करने, गरीबों को दान देने, मंत्रों का जाप करने, व्रत रखने और उपवास करने की सिफारिश की जाती है।

सोमवती अमावस्या के दिन किस मंत्र का जाप करने का विशेष फल होता है?

इस दिन भगवान शिव के मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करने से विशेष लाभ प्राप्त होते हैं।

सोमवती अमावस्या के दिन कैसे व्रत रखा जाता है?

इस दिन व्रत रखने की सिफारिश की जाती है, जिससे भगवान की कृपा प्राप्त होती है।

सोमवती अमावस्या के दिन ब्रह्मचर्य का पालन क्यों किया जाता है?

ब्रह्मचर्य का पालन करने से मन को शांति मिलती है और आध्यात्मिक उन्नति होती है, इसलिए इसे सुझाया जाता है।

सोमवती अमावस्या के महत्व का संक्षेप में क्या है?

सोमवती अमावस्या हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो हमें भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का अवसर प्रदान करता है,

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