अचलासप्तमी- रथसप्तमी- आरोग्यसप्तमी(Achla Saptmi-Rath Saptami – Arogya Saptami)

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अचलासप्तमी- रथसप्तमी- आरोग्यसप्तमी(Achla Saptmi-Rath Saptami – Arogya Saptami)

अचला सप्तमी- रथ सप्तमी- आरोग्य सप्तमी(Achla Saptmi-Rath Saptami – Arogya Saptami)

पौराणिक कहानी है कि माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को सूर्य देव अपने रथ पर सवार होकर पूरे संसार में प्रकाश आलोकित करना शुरू किया था. इसलिए यह रथ सप्तमी या सूर्य जयंती के नाम से भी जाना जाता है. साथ ही इस दिन सूर्य देव का जन्मदिन का उत्सव भी मनाया जाता है।

पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 15 फरवरी को सुबह 10 बजकर 12 मिनट से शुरू हो रही है और 16 फरवरी दिन शुक्रवार को इसका समापन होगा। उदया तिथि के अनुसार 16 फरवरी के दिन अचला सप्तमी मनाई जाएगी।

अचला सप्तमी- रथ सप्तमी- आरोग्य सप्तमी का महत्व (Achla Saptmi-Rath Saptami – Arogya Saptami)

अचला सप्तमी को रथ सप्तमी, भानु सप्तमी और आरोग्य सप्तमी के नाम से भी जानते हैं। इस दिन सूर्य देव की पूजा करते हैं और उनको जल का अर्घ्य देते हैं। मान्यता है कि इस दिन अगर भक्त पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ पूजा करते हैं तो सूर्यदेव की कृपा से रोग दूर होता है, धन-धान्य में वृद्धि होती है।

अचला सप्तमी- रथ सप्तमी- आरोग्य सप्तमी मुहूर्त(Achla Saptmi-Rath Saptami – Arogya Saptami)

पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी इस साल गुरुवार 15 फरवरी 2024 को सुबह 10 बजकर 15 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन यानी शुक्रवार 16 फरवरी 2024 की सुबह 8 बजकर 58 मिनट पर खत्म होगी। तिथि के आधार पर रथ सप्तमी का व्रत और स्नान शुक्रवार 16 फरवरी 2024 के दिन ही मनाया जाएगा।

अचला सप्तमी- रथ सप्तमी- आरोग्य सप्तमी पूजा विधि (Achla Saptmi-Rath Saptami – Arogya Saptami)

रथ सप्तमी के दिन सूर्य के सातों घोड़े उनके रथ को वहन करना प्रारंभ करते हैं। रथ सप्तमी के दिन भगवान सूर्यनारायण की विशेष पूजा-अर्चना से उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। रथ सप्तमी पर जन्म कुंडली के पीड़ित सूर्य की पूजा अर्चना करके बलवान किया जा सकता है। रथ सप्तमी पर भगवान सूर्यनारायण की प्रिय धातु तांबे से बने छल्ले को गंगाजल से शुद्ध करके अनामिका उंगली में धारण किया जाता है।

रथ सप्तमी के दिन सूर्योदय के बाद भक्त स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। इस दौरान भक्त को भगवान सूर्य देव की ओर मुख करके नमस्कार करते हैं। इसके बाद घी का दीपक जलाकर लाल रंग के फूल और धूप से सूर्य भगवान की पूजा करते हैं। माना जाता है कि इस सभी विधियों के अनुसार सूर्यदेव का पूजन करने से भगवान सूर्य भक्तों को अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु का वरदान देते हैं।

अचला सप्तमी- रथ सप्तमी- आरोग्य सप्तमी (Achla Saptmi-Rath Saptami – Arogya Saptami) के दिन करें यह गलतियां

रथ सप्तमी के दिन कुछ ऐसे कार्य होते हैं, जिनको हमें विशेष रूप से उस दिन नहीं करना चाहिए जैसे किसी पर क्रोध का क्रूरता न दिखाएं, घर और आसपास के वातावरण में शांति बनाए रखें, शराब अथवा किसी प्रकार का तामसिक भोजन का सेवन न करें साथ ही इस दिन नमक का सेवन भी वर्जित माना जाता है।

अचला सप्तमी- रथ सप्तमी- आरोग्य सप्तमी (Achla Saptmi-Rath Saptami – Arogya Saptami) को  मिलते हैं ये लाभ

सूर्य सप्तमी के दिन भगवान सूर्य की विधि-विधान पूर्वक पूजा करने से साधक को आरोग्य के साथ-साथ समृद्धि की भी प्राप्ति होती है। इसके साथ ही इस दिन दान-पुण्य करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन पर भगवान सूर्य के निमित्त व्रत करने से सभी पापों का नाश होता है। रथ सप्तमी पर अरुणोदय में स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है।

ऐसा करने से व्यक्ति को अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति हो सकती है, इसलिए रथ सप्तमी को आरोग्य सप्तमी भी कहा जाता है। सूर्य सप्तमी के दिन घर पर स्नान करने की अपेक्षा नदी आदि में स्नान करना ज्यादा लाभकारी माना जाता है। सूर्य सप्तमी पर स्नान, दान-पुण्य और सूर्यदेव को अर्घ्य देने से लंबी आयु, आरोग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

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